Trading Kya Hai, ट्रेडिंग कैसे सीखें। Intraday, Option trading

जब कोई शेयर मार्केट में उतरता है, तो उसे नए-नए शब्द सुनने को मिलते हैं। उनमें से एक है “ट्रेडिंग”। इस आर्टिकल से आप ट्रेडिंग की डीप जानकारी हासिल कर सकते हैं। यह एक आर्टिकल है जिससे आप ट्रेडिंग की जरूरी बातें समझ पाएंगे और उनका इस्तेमाल भी कर पाएंगे।

ट्रेडिंग क्या है?

सिक्योरिटीज को खरीदना और बेचना पैसा कमाने के लिए जिनकी वैल्यू हर रोज़ ऊपर-नीचे होती रहती है, ट्रेडिंग यानी एक ही दिन में सिक्योरिटीज को खरीदना और बेचना प्रॉफिट के लिए।

इसमें ट्रेडर्स मार्केट के उतार-चढ़ाव का इस्तेमाल करके एक ही दिन में सिक्योरिटीज को खरीदते और बेचते हैं, पुरे इस प्रोसेस को ट्रेडिंग करना कहते हैं।

सिक्योरिटीज यानी शेयर्स, म्यूच्यूअल फण्ड, बोंड, आप्शन, आदि। अगर आप शेयर मार्केट में ट्रेडिंग करना चाहते हैं, तो आपको शेयर मार्केट ट्रेडिंग के फंडामेंटल्स की जानकारी होनी चाहिए। lumsump या सिप म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट कर सकते है.

ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग करना ज़रूरी बन गया है क्योंकि सेविंग करके इन्फ्लेशन से बचना और अपनी लक्ष्य को पाना मुश्किल है।

ट्रेडिंग कितने प्रकार के होते हैं?

Trading Kya Hai और Kaise Sikhe Intraday trading kya hai

जो लोग ट्रेडिंग में नए होते हैं, उन्हें पता नहीं होता है कि किस ट्रेडिंग स्टाइल का इस्तेमाल करना चाहिए, इसलिए हमने पोपुलर ट्रेडिंग के प्रकार को बताया है। ट्रेडिंग के बहुत सारे प्रकार होते हैं। हम कुछ प्रसिद्ध ट्रेडिंग types के बारेमे जानेंगे:

Intraday trading kya hai?

ट्रेडिंग में सबसे पोपुलर है इंट्राडे ट्रेडिंग। इंट्राडे ट्रेडिंग में ट्रेडर्स एक ही दिन में स्टॉक खरीदते और बेचते हैं प्रॉफिट कमाने के लिए। इंट्राडे ट्रेडिंग आप ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के ज़रिए कर सकते हैं।

मान लीजिए कि एक आदमी इंट्राडे ट्रेडिंग करना चाहता है तो उसे ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में स्टॉक खरीदने के लिए ‘Intraday’ ऑप्शन सेलेक्ट करना होगा। इससे वह आदमी एक ही कंपनी के स्टॉक्स एक ही दिन में खरीद और बेच सकता है, मार्केट बंद होने से पहले।

इंट्राडे ट्रेडिंग का मकसद होता है कि मार्केट के उतार-चढ़ाव का इस्तेमाल करके प्रॉफिट कमाना। इंट्राडे ट्रेडिंग को डे ट्रेडिंग भी कहते हैं। यह भी याद रखें कि long-term में शेयर मार्केट से अच्छा पैसा कमाया जा सकता है।

Option trading kya hai?

Trading Kya Hai और Kaise Sikhe Option trading kya hai

Options trading से आप शेयर, ETFs, आदि खरीद और बेच सकते हैं, किसी एक specific प्राइस और specific डेट पर। तय किये गए समय में शेयर खरीदें या नहीं, ये आपके पास आप्शन होता है।

आसान भाषा में कहें तो आप आप्शन ट्रेडिंग से आज तय कर सकते हैं कि एक महीने बाद आप इस शेयर को कितने प्राइस में लेंगे, फिर उस समय अगर शेयर की वैल्यू आपके तय किये गए प्राइस से कम होगी तो आपके ऊपर है कि आप चाहें तो खरीद सकते हैं और ना चाहें तो नहीं भी खरीद सकते हैं।

इसी तरह एक महीने बाद शेयर की वैल्यू तय किए गए प्राइस से ज्यादा होगी तो आप प्रॉफिट के लिए इसे खरीद सकते हैं। ये एक तरह का कॉन्ट्रैक्ट होता है।

उदाहरण के लिए, अगर आप ₹100 में 1 महीने बाद शेयर खरीदना चाहते हैं किसी सेलर से तो आपको ₹20 ‘प्रीमियम’ देना होता है, ये ‘right’ के लिए है कि आपको एक महीने बाद ₹100 में शेयर मिलेगा।

अब एक महीने बाद शेयर प्राइस ₹150 होगा तो आप ₹100 में शेयर खरीदेंगे क्योंकि आपकी एक महीने पहले सेलर के साथ डील हुई थी, लेकिन अगर शेयर की वैल्यू घटकर ₹80 हो जाती है तो आप अब शेयर खरीद भी सकते हैं और नहीं भी, ये आपके ऊपर है, शेयर की प्राइस कम होगी तो क्यों खरीदेंगे, इससे आपका लोस होगा।

इस सिनेरियो में आपका सिर्फ प्रीमियम यानि ₹20 का लोस हुआ है। आप्शन ट्रेडिंग में पास के ये राईट है कि आप डील करने के बाद शेयर खरीदें या ना खरीदें। लेकिन फ्यूचर ट्रेडिंग में आपको खरीदना ही होगा। ये फ्यूचर और आप्शन ट्रेडिंग में अंतर है।

Futures trading kya hai?

फ्यूचर ट्रेडिंग एक कॉन्ट्रैक्ट है जो आप्शन ट्रेडिंग की ही तरह काम करता है। इसमें भी buyer और सेलर कॉन्ट्रैक्ट कर सकते हैं की तय किये गए समय में तय किए गए प्राइस पर shares को खरीदा जायेगा buyer के द्वारा।

कॉन्ट्रैक्ट करते समय buyer को ‘प्रीमियम’ कुछ अमाउंट देना होगा हक (right) के लिए, फिर जब तय किया गया समय आता है तो buyer को शेयर खरीदने ही होंगे, चाहे शेयर का प्राइस बढ़ा हो या घटा हो।

फ्यूचर ट्रेडिंग में आपको सिक्यूरिटी खरीदना ही पड़ेगा या फिर आप समय से पहले कॉन्ट्रैक्ट टोकन को किसी दूसरे को बेच सकते हैं, फिर आप जिसे बेचते हैं उसे वे shares खरीदने पड़ते हैं। फ्यूचर और आप्शन ट्रेडिंग करने के लिए एक्सपीरियंस की ज़रूरत होती है।

Positional Trading kya hai

पोजीशनल ट्रेडिंग यानि मार्केट में शेयर को खरीदना और लॉन्ग-टर्म के लिए होल्ड करना प्रॉफिट कमाने के लिए। इसमे शॉर्ट-टर्म के बजाय लॉन्ग-टर्म का इस्तेमाल होता है, कुछ हफ्ते, कुछ महीने, आदि के लिए शेयर्स को होल्ड किया जाता है, फिर सही समय पर बेच दिया जाता है। इस स्ट्रेटेजी को पोजिशनल ट्रेडिंग कहते है।

Scalping Trading kya hai

Trading Kya Hai और Kaise Sikhe Scalping Trading kya hai

स्काल्पिंग एक शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग स्टाइल है जिसमें स्कैल्पर्स जो ये स्टाइल अपनाते हैं वे एक ही दिन में शेयर की वोलेटिलिटी का इस्तेमाल करके बार बार शेयर खरीदकर और बेचकर छोटे-छोटे प्रॉफिट कमाते हैं।

कम प्राइस में शेयर खरीदकर ज्यादा प्राइस में शेयर बेचते हैं। स्कैल्पर्स इसके लिए सबसे ज्यादा लिक्विड वाले शेयर्स को चुनते हैं जिनका प्राइस हर वक्त बदलते रहता है। बिना लिक्विड वाले स्टॉक्स के साथ स्काल्पिंग ट्रेडिंग नहीं कर सकते हैं।

वे लोग यह मानते हैं कि मार्केट के उतार-चढ़ाव का इस्तेमाल करके छोटे डील और कम रिस्क लेना आसान होता है, जिससे वे छोटे प्रॉफिट कमाते हैं। दूसरे ट्रेडर्स लोंग-टर्म के लिए होल्ड करके अच्छे प्रॉफिट कमाने का सोचते हैं, वहीं पर स्कैल्पर्स कम वक्त में छोटे प्रॉफिट कमाने का सोचते हैं।

लेकिन हर बार सफलता मिलने के लिए एक्सपीरियंस होना बहुत जरूरी है, इसमें सही एग्जिट पॉलिसी की जरूरत होती है वर्ना एक बड़ा लॉस इनके सारे छोटे प्रॉफिट से बड़ा हो सकता है। स्कैल्प ट्रेडिंग करने के लिए डिसिप्लिन, स्टैमिना और निश्चितता जैसे स्किल की जरूरत होती है।

Swing Trading kya hai

स्विंग ट्रेडिंग इस तरह की ट्रेडिंग है जिसमें ट्रेडर्स स्टॉक को एक दिन से ज्यादा के समय के लिए होल्ड करके करते हैं। स्टॉक्स को कुछ दिनों के लिए या हफ्तों के लिए भी होल्ड किया जाता है। कुछ दिनों या हफ्तों तक स्टॉक होल्ड करके प्रॉफिट कमाने के लिए स्विंग ट्रेडिंग का उपयोग किया जाता है।

स्विंग ट्रेडिंग में अवसरों का फायदा उठाने के लिए अलग-अलग युक्ति का इस्तेमाल किया जाता है। जिस तरह किसी रबर बैंड को उतना ही खींचा जा सकता है जितना खींचने पर वह वापस टूट जाएगा, उसी तरह सिक्यूरिटीज भी कुछ सीमा तक ही बढ़ सकते हैं या घट सकते हैं। इन समय पर सही वक्त पर शेयर खरीदना और बेचना होता है, इसी कांसेप्ट पर स्विंग ट्रेडिंग की जाती है।

स्विंग ट्रेडिंग में अक्सर एक दिन से ज्यादा शेयर होल्ड करते हैं और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट की तरह महीनों या साल भर होल्ड नहीं करते हैं, उससे कम ही होल्ड करते हैं। स्विंग ट्रेडिंग में बड़े नुकसान से बचने के लिए रिस्क मैनेजमेंट बहुत ज़रूरी है, इसलिए stop-loss orders का इस्तेमाल करना चाहिए।

Delivery Trading / Long-term Trading

डिलीवरी ट्रेडिंग यानि लॉन्ग-टर्म के लिए इन्वेस्टमेंट करना, डिलीवरी ट्रेडिंग स्टाइल में जब आप ट्रेडिंग करते हैं, तो आप जब शेयर खरीदते हैं तो वो शेयर आपके डीमेट अकाउंट में डिलीवर होगा, फिर कम से कम एक दिन आपको होल्ड करना होगा, फिर आप लॉन्ग-टर्म के लिए भी होल्ड कर सकते हैं, प्रॉफिट कमाने के लिए इसे डिलीवरी ट्रेडिंग कहते हैं।

उदाहरण के लिए, अगर आप ₹2500 के शेयर्स खरीदते हैं ABC कंपनी से, तो जब transaction कंपलीट होगा, तो ₹2500 के शेयर्स आपके डीमेट अकाउंट में क्रेडिट होंगे और आपके बैंक अकाउंट से पैसे डेबिट होंगे।

डिलीवरी ट्रेडिंग में आपको कम से कम एक दिन तक शेयर्स को होल्ड करना होगा या आप ज्यादा वक्त के लिए भी होल्ड करके रख सकते हैं। डिलीवरी ट्रेडिंग में आप एक ही दिन में शेयर्स खरीद और बेच नहीं सकते हैं।

Forex Trading kya hai?

Trading Kya Hai और Kaise Sikhe Forex Trading kya hai

फॉरेक्स ट्रेडिंग, जिसे फॉरेन एक्सचेंज ट्रेडिंग भी कहते है, इसमें currencies की ट्रेडिंग की जाती है। उदाहरण के लिए, भारतीय रुपया देकर US डॉलर को खरीदना। हमें फॉरेन करेंसी की जरूरत है चीजों को इम्पोर्ट करने के लिए और चीजों को एक्सपोर्ट करने के बाद जो फॉरेन करेंसी आती है,

वो भी ज़रूरी है कुशलतापूर्वक संचालित करने के लिए। ज़रूरी चीजों को इम्पोर्ट करने के लिए फॉरेन करेंसी की ज़रूरत है इसलिए सरकारें, सेंट्रल बैंक, कमर्शियल बैंक्स, ब्रोकर्स, फोरेक्स डीलर और आम व्यक्ति भी इसमें भाग लेते हैं, यानि खरीद और बिक्री करते हैं साथ ही लोन चुकाने, करेंसी की अदला-बदली करने के लिए।

Algorithmic Trading kya hai

अल्गोरिथ्मिक ट्रेडिंग या अल्गो ट्रेडिंग यानी एल्गो ट्रेडिंग, जिसमें ट्रेड को ऑटोमेटेड तरीकों से कंप्यूटर की मदद से पूरा किया जाता है। कंप्यूटर प्रोग्राम में इंस्ट्रक्शन सेट किए जाते हैं और एक अल्गोरिथम बनाया जाता है ताकि ऑटोमेटिकली ट्रेड को एक्सीक्यूट किया जा सके। ये अल्गोरिथम विभिन्न इनपुट पर निर्भर कर सकते हैं, जैसे कि प्राइस, टाइमिंग, और अन्य मैट्रिक्स का उपयोग करके ट्रेड कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, जैसे कि एक व्यक्ति शेयर खरीदने और बेचने के लिए पॉपुलर और जरूरी डेटा को देखता है, उसके मुताबिक फैसले लेता है, हर रोज़ DMAS (Day moving average) पर नजर रखता है। लेकिन अगर ऐसा एक अल्गोरिथम बनाया जाए जो इन सभी रियल-टाइम डेटा को देखकर 100 शेयर्स को खरीदने के लिए कंपनी का मूल्य निर्धारित करता है, तो यह इंसानों के लिए संभाव नहीं हो सकता है, लेकिन एक कंप्यूटर प्रोग्राम के लिए यह कार्य संभाव है।

हम जो मैट्रिक्स देखते हैं, उन्हें अल्गोरिथम में इंस्ट्रक्शन दिया जाता है कि अगर इस प्राइस, टाइमिंग, और 7-डे DMA (डे मूविंग एवरेज) पर तो शेयर खरीदें। इस तरह का ट्रेडिंग स्टाइल संयुक्त राज्य अमेरिका में बहुत प्रसिद्ध है और भारत में भी इसका बहुत सारे लोगों द्वारा उपयोग किया जाता है।

Fundamental Trading kya hai

जैसा कि इसका नाम है, ट्रेडर्स स्टॉक ढूंढने के लिए कंपनी के फंडामेंटल एनालिसिस का उपयोग करते हैं। इसमें कंपनी और कंपनी की वित्तीय जानकारी को ज्यादा महत्व दिया जाता है। फंडामेंटल ट्रेडर्स अक्सर अपने स्टॉक्स को लंबे समय तक होल्ड करते हैं ताकि प्राइस में अच्छी तरह की वृद्धि हो सके। यह ट्रेडिंग स्टाइल स्टॉक इन्वेस्टमेंट के रूप में होता है, जैसा कि इसका नाम है।

Technical Trading kya hai in Hindi

ये फंडामेंटल ट्रेडर्स से अलग होते हैं, टेक्निकल ट्रेडिंग में ज्यादा फोकस प्राइस ट्रेंड पर होता है और उसे एनालिसिस किया जाता है। मार्केट को जानने के लिए वे चार्ट और डेटा का उपयोग करते हैं।

टेक्निकल ट्रेडिंग में रिस्क फंडामेंटल और पोजीशनल ट्रेडिंग के मुकाबले अधिक होता है। ट्रेडर्स जो ट्रेडिंग करने के लिए चार्ट्स और ग्राफ का उपयोग करते हैं, उनके पास मार्केट की जानकारी होनी चाहिए।

तो ये थे कुछ पॉपुलर ट्रेडिंग के प्रकार। अब आपको पता चल गया होगा कि ट्रेडिंग क्या है और ट्रेडिंग के कितने प्रकार होते हैं। ट्रेडिंग के किसी भी स्टाइल को अपनाने से पहले आपको ट्रेडिंग कैसे सीखें और कैसे करें ये जानना चाहिए, शेयर मार्केट कैसे काम करता है जानना चाहिए, फिर नॉर्मल ट्रेडिंग से शुरू करना चाहिए और फिर आपको दूसरे ट्रेडिंग स्टाइल को जानकर सीखना चाहिए ताकि आप उन स्टाइल्स को अप्लाई कर सकें।

Trading Meaning in Hindi

ट्रेडिंग को हिंदी में ‘व्यापार’ कहते है, क्योंकि शेयर या दूसरी सिक्योरिटीज को खरीदना और बेचना एक व्यापार ही होता है।

Trading ka Matlab kya hota hai

जब हम किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदते या बेचते हैं ताकि प्रॉफिट कमाया जा सके, तो उसे ‘ट्रेडिंग’ कहते है।

ट्रेडिंग कैसे करें । Trading kaise kare

Trading kaise kare इसके लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें:

  1. सबसे पहले एक ब्रोकर का चुनाव करें, जैसे Upstox, Zerodha, आदि।
  2. ब्रोकर चुनने से पहले उसके सभी चार्जेस, सेवाएँ, और ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म को जान लें।
  3. ब्रोकर से ऑनलाइन डीमैट अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट खोलें।
  4. डीमैट अकाउंट में सुरक्षाएँ होल्ड करने में और ट्रेडिंग अकाउंट में लेन-देन करने में काम आता है।
  5. अपने डीमैट/ट्रेडिंग अकाउंट में लॉग इन करें और पैसे जोड़ें।
  6. अब स्टॉक को चुनें, जानकारी देखें और स्टॉक को खरीदने और बेचने के लिए लेन-देन करें।
  7. इस तरह आप ट्रेडिंग शुरू कर सकते हैं।

ट्रेडिंग कैसे सीखें । Trading Kaise Sikhe

ट्रेडिंग कैसे सीखें? Trading Kaise Sikhe

Trading Kaise Sikhe इसके लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें:

  1. ट्रेडिंग आप ऑनलाइन हमारी जैसी वेबसाइट के आर्टिकल्स पढ़कर सीख सकते हैं। हमारे ‘शेयर मार्केट केटेगरी’ के सारे आर्टिकल्स आपको आसान भाषा में कठिन चीजें समझाते हैं, उन्हें ज़रूर पढ़ें।
  2. ऑनलाइन यूट्यूब वीडियोस देखकर सीख सकते हैं, लेकिन ऐसे चैनल के वीडियोस देखें जो भरोसेमंद हों, क्योंकि आजकल फ्रॉड चीजें बहुत ज़्यादा हो गई हैं।
  3. ऑनलाइन कोर्सेज से सीख सकते हैं।
  4. किताबों को पढ़कर सीख सकते हैं, किताबों में अनुभवी इन्वेस्टर्स और फाइनेंशियल ऑथर अपने एक्सपीरियंस को शेयर करते हैं, किताबों से आप अच्छी जानकारी हासिल कर सकते हैं।
  5. किसी प्रोफेशनल या टीचर से सीख सकते हैं, ऐसा व्यक्ति जिसे ट्रेडिंग करनी आती हो, उससे सीख सकते हैं। यह आपका दोस्त, रिश्तेदार, टीचर या कोई प्रोफेशनल ट्रेडर हो सकता है, जिस पर आप भरोसा कर सकते हैं।
  6. डीमैट अकाउंट खोलकर छोटे अमाउंट से ट्रेडिंग करना शुरू करें और सीखें. अनुभव हासिल करें और इन्वेस्टमेंट बढ़ा सकते है.

शेयर मार्किट कैसे काम करता है । Share market kaise kaam karta hai

कम्पनियाँ अपने शेयरों को बेचने और खरीदने के लिए दो बड़े स्टॉक एक्सचेंज में अपनी कंपनी को लिस्ट कराती हैं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE). जो लोग शेयर्स को खरीदते हैं, उन्हें कंपनी में उतने शेयरों की ownership मिलती है, और वे शेयरहोल्डर कहलाए जाते हैं।

शेयर मार्केट इस तरह काम करता है:

  • इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के जरिए कंपनी पहली बार प्राइमरी मार्केट में लिस्ट होती है।
  • अब सेकंडरी मार्केट में शेयरों को बांटा जाता है, यानि यहाँ से इन्वेस्टर्स कंपनी में इन्वेस्ट कर सकते हैं।
  • इन स्टॉक एक्सचेंज में स्टॉक ब्रोकर्स और ब्रोकरेज फर्म्स रजिस्टर होते हैं, और इन स्टॉक ब्रोकरों के माध्यम से ही इन्वेस्टर्स ट्रेड करते हैं।
  • आप उन ब्रोकरों के प्लेटफ़ॉर्म पर रजिस्टर होकर शेयर खरीदने या बेचने के लिए आर्डर प्लेस कर सकते हैं।
  • जब दोनों buy और sell आर्डर मैच करते हैं, तब आर्डर पूरा होता है।
  • ये सारा प्रोसेस होने में ‘T+2’ डेज लगते हैं, यानि खरीदे गए शेयर्स आपके डीमैट अकाउंट में आर्डर प्लेस करने के दो दिन बाद आएंगे. शेयर मार्केट कैसे चलता है, हमने कम शब्दों में और आसान भाषा में बताया है।

भारत के बेस्ट ट्रेडिंग ऐप । Bharat ke best trading app

भारत के टॉप 10 बेस्ट ट्रेडिंग ऐप्प है:

  • Upstox Pro App – फ्री डीमैट अकाउंट, Intraday और F&O के लिए बेस्ट है।
  • Zerodha Kite – पूरे ट्रेडिंग के अनुभव के लिए बेस्ट है।
  • Groww – Beginners के लिए बेस्ट है।
  • Angel One – हैवी ट्रेडर्स के लिए बेस्ट है।
  • 5paisa App – रिटेल ट्रेडिंग के लिए बेस्ट है।
  • ICICI Direct App – अनुभवी ट्रेडर्स के लिए बेस्ट है।
  • MO Investor – इक्विटीज और MFS के लिए बेस्ट है।
  • Paytm Money – दोनों ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स के लिए ठीक है।
  • Sharekhan – अनुभवी इन्वेस्टर्स और ट्रेडर्स दोनों के लिए ठीक हैं।
  • IIFL Markets Mobile App – दोनों बेगिनर्स और अनुभवी इन्वेस्टर्स के लिए बेस्ट है।

डीमैट अकाउंट क्या है । Demat Account Kya Hai

Demat account kya hai और What is demat account in hindi

डीमैट अकाउंट एक तरह का डिजिटल अकाउंट है जिसमें हम सिक्युरिटीज़ को जमा कर सकते हैं। आजके समय में डीमैट अकाउंट के बिना शेयर मार्केट में ट्रेडिंग नहीं कर सकते हैं। जिस तरह बैंक अकाउंट में पैसे जमा करते हैं, वैसे ही डीमैट अकाउंट में शेयर्स को होल्ड किया जाता है।

ट्रेडिंग अकाउंट को ब्रोकर के प्लेटफ़ॉर्म पर लेन-देन के लिए उपयोग किया जाता है। ये दोनों अकाउंट जरूरी हैं। ये दोनों अकाउंट आप किसी भी ब्रोकर से खोलवा सकते हैं। ये दोनों अकाउंट एक साथ ही ब्रोकर द्वारा खोले जाते हैं।

डीमैट अकाउंट कैसे खोले । Demat Account Kaise Khole

आप जिस DP/ब्रोकर को चुनते हैं, उनके ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म यानी ऐप या वेबसाइट पर जाकर डीमैट अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट खोल सकते हैं। उधारण के लिए अगर आप देश के टॉप ब्रोकर मेसे एक Upstox को चुनते है तो आपको उनकी ऑफिसियल वेबसाइट पर जाकर फ्री डीमैट अकाउंट खोलना होगा. डीमैट अकाउंट से आप शेयर मार्केट में शेयर खरीद और बेच सकते हैं।

स्टॉक ब्रोकर क्या है । Stock Broker Kya Hai

स्टॉक ब्रोकर यानि जिसके जरिए हम स्टॉक और दूसरी सिक्युरिटीज़ को खरीद और बेच सकते हैं, SEBI में रजिस्टर्ड स्टॉक ब्रोकर से ही डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट खोलना चाहिए। पहले, DP (Depository Participant) से अकाउंट खोला जाता था, लेकिन आजकल के समय में DP और ब्रोकर दोनों एक ही संस्था होते हैं, जैसे कि Upstox, Zerodha, Groww, आदि।

ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट मे क्या अंतर है । Trading vs Investment

ट्रेडिंग यानि कम वक्त में ट्रेड को अंजाम देना, ट्रेडिंग को अक्सर एक दिन, हफ्ता या महीने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हम जो सिक्युरिटीज़ खरीदते हैं, उन्हें शॉर्ट-टर्म के लिए होल्ड करते हैं, तो उसे ट्रेडिंग कहते हैं।

इन्वेस्टमेंट यानि ज्यादा समय के लिए ट्रेड को अंजाम देना, ट्रेडिंग को अक्सर कई महीनों या सालों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हम जो सिक्युरिटीज़ को लॉन्ग-टर्म के लिए खरीदते हैं, उसे इन्वेस्टमेंट कहते हैं।

ट्रेडिंग करते समय किन बातों को याद रखे?

ट्रेडिंग करने के नियम:

  • ट्रेडिंग शुरू करने से पहले शेयर मार्केट को सीखें/जानें।
  • ट्रेडिंग शुरू करने से पहले हमेशा प्लान बनाएं।
  • ट्रेडिंग को एक व्यवसाय की तरह व्यवहार करें।
  • शेयर मार्केट में डेटा को कैसे दिखाया जाता है और कैसे समझा जाता है, ये सीखें।
  • इन्वेस्ट करने से पहले सारी चीजें एनालाइज करें।
  • आप जिसमें निवेश करना चाहते हैं, उन कंपनियों को जानें, उनके व्यापारिक मूल्यांकन, मौलिक विश्लेषण, आदि को जानें।
  • हमेशा स्टॉप लॉस का उपयोग करें।
  • आपको ट्रेडिंग को बंद करने की जरूरत होती है, इसका पता होना चाहिए।
  • उतना ही निवेश करें जिसके नुकसान का सामना करने पर आप सह सकें।
  • इमोशन्स से ज्यादा फैक्ट्स पर ध्यान दें।
  • ट्रेडिंग में प्रॉफिट और हानि होती रहती है, आपको जियादा सरप्राइज नहीं होना चाहिए।
  • बिना स्टॉप लॉस के इंट्राडे में ट्रेड न करें।
  • किसी के सुझाव या कहने पर ट्रेड न करें, बल्कि जब आप पूरी तरह से प्रासंगिक महसूस करते हैं, तब ही ट्रेड करें।
  • अपने प्रॉफिट और लॉसेस का विश्लेषण करें और अपनी गलतियों से सिखें और उनसे अवगत हों।
  • कोई सोने का नियम नहीं होता, अभ्यास ही एक व्यापारी और निवेशक को महान बना सकता है।

ट्रेडिंग करके पैसे कैसे कमाएं?

ट्रेडिंग करके पैसे कमाने के लिए आपको पहले ट्रेडिंग को सीखना होगा, डीमैट अकाउंट खोलना होगा, ट्रेडिंग कैसे करते हैं यह जानना होगा, ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है, रिस्क मैनेजमेंट, फंडामेंटल एनालिसिस, चार्ट पैटर्न्स, डेटा, कंपनी की जानकारी ये सारी चीजें जाननी होंगी। फिर आप कंपनी के स्टॉक में पैसा लगाकर ट्रेडिंग करके पैसा कमा सकते हैं।

ट्रेडिंग से पैसे कमाने के लिए सहीं स्टॉक कैसे चुनें?

इन्वेस्ट करने के लिए बेस्ट स्टॉक्स को कैसे चुनें जानें:

  1. अपने फाइनेंसियल गोल्स को जानें।
  2. एक अच्छा ट्रेडिंग प्लान बनाएं और अपनी रिस्क क्षमता को जानें।
  3. उन्हीं स्टॉक्स को खरीदें जिनकी कंपनियाँ आप समझते हैं।
  4. ज़रूरी फाइनेंसियल रेशियों को देखें और समझें।
  5. कंपनी में इन्वेस्ट करने से पहले उसके प्रतिस्पर्धी को जानें।
  6. स्टॉक चुनने से पहले कंपनी की सारी जानकारी हासिल करें।
  7. एंट्री और एग्जिट स्ट्रैटेजी बनाएं।
  8. निवेश करते समय मार्केट को समझें और मार्केट स्क्रीनर का उपयोग करें।
  9. स्टॉक्स की रिसर्च में टेक्निकल एनालिसिस और फंडामेंटल एनालिसिस शामिल करें।
  10. कंपनी के स्टॉक प्राइस को अंडरवैल्यूड है या ओवरवैल्यूड है जानें।

ट्रेडिंग के फायदें और नुक्सान । Trading ke Fayde aur Nuksaan

ट्रेडिंग के फायदे:

  • ऑनलाइन ट्रेडिंग करना आजके समय में आसान और सुविधाजनक है।
  • ट्रेडिंग करने का सबसे बड़ा कारण प्रॉफिट है, अगर आप ट्रेडिंग को समझदारी और स्ट्रेटेजी बनाकर करते हैं तो आप एक साल में ट्रेडिंग से अच्छा प्रॉफिट कमा सकते हैं।
  • ट्रेडिंग से आप derivatives कमा सकते हैं।
  • ब्रोकर की ओर से किए जाने वाले फ्रॉड कम हो गए हैं क्योंकि शेयर मार्केट को सकती से SEBI इस्तेमाल कर रही है।
  • ऑनलाइन ट्रेडिंग में transparency आ चुकी है, अब आप बिना ब्रोकर के representatives दखलंदाजी के शेयर खरीद और बेच सकते हैं।
  • ऑनलाइन ट्रेडिंग अकाउंट से आप अपने पोर्टफोलियो को घर बैठे मैनेज कर सकते हैं, पिछले स्टेटमेंट्स देख सकते हैं।

ट्रेडिंग के नुकसान:

  • शेयर मार्केट बहुत ज्यादा वोलेटाइल है, यानि दुनिया के किसी भी कोने में कुछ भी होता है तो उसका असर स्टॉक के प्राइस पर होता है। ये प्राइस हमेशा ऊपर-नीचे होते रहते हैं।
  • अक्सर लोग समझते हैं कि आसानी से ट्रेडिंग करके पैसा कमाया जाता है, लेकिन वे ये भूल जाते हैं कि इससे आसानी से पैसा गवाया भी जाता है।
  • ज्यादा टैक्स लगता है।
  • हर इन्वेस्टमेंट में कुछ न कुछ लेवल का रिस्क होता है, कभी ज्यादा कभी कम।
  • इतने रेगुलेटरी नियम होने के बावजूद भी कुछ लोग सिस्टम के loopholes का इस्तेमाल करके फायदा उठाते हैं।
  • यह बात आपको कभी नहीं भूलनी चाहिए कि शेयर मार्केट में आदे से ज्यादा लोगों का लॉस होता है।
  • क्योंकि हम ट्रेडिंग कहीं से और कभी भी कर सकते हैं, इसलिए हम हर वक्त ट्रेडिंग करते रहते हैं, जिससे overtrading और impulsive डिसिशन लेने के चांसेस बढ़ते हैं।
  • नए ट्रेडर्स को नुकसान से बचने के लिए अच्छा रिसर्च और एनालिसिस करना चाहिए। इसी तरह डीमेट अकाउंट फायदें और नुक्सान भी है.

ट्रेडिंग के दुसरे प्रकार?

Crypto trading in Hindi?

Cryptocurrency trading यानि cryptocurrencies को खरीदना और बेचना किसी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज से.

Bitcoin trading kya hai?

किसी एक्सचेंज प्लेटफार्म से bitcoin के बचने और खरीदने को बिटकॉइन ट्रेडिंग कहते है.

Paper trading kya hai?

पेपर ट्रेडिंग एक ऐसा रास्ता है जिसमें इन्वेस्टर्स बिना असली पैसे लगाएं स्टॉक्स को कैसे खरीदते हैं और बेचते हैं ये सीखने को मिलता है। इसे स्टॉक मार्केट सिम्युलेटर कहते हैं, यहां पर लोगों को यह सिखने का अवसर मिलता है कि कैसे पैसे लगाकर शेयर मार्केट में स्टॉक्स खरीदे और बेचे जाते हैं। इसमें असली पैसे नहीं लगते हैं, अर्थात् किसी का भी नुकसान नहीं होता है।

What is a trading account in Hindi?

स्टॉक मार्केट में शेयर खरीदने और बेचने के लिए ट्रेडिंग अकाउंट का उपयोग होता है। पहले ऑनलाइन ट्रेडिंग अकाउंट उपलब्ध नहीं थे, और आपको ऑफलाइन फिजिकली जाकर शेयर खरीदने और बेचने की आवश्यकता होती थी।

What is future and option trading in Hindi?

ये एक तरह के contracts है, जिसमे इन्वेस्टर्स पहले से तय किये गये प्राइस पर शेयर को आगे जाकर खरीद सकते है.

Books for trading in Hindi?

अगर आपको किताबों से ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट सीखना है तो इस आर्टिकल को पढ़े.

FAQ

  1. ट्रेडिंग क्या है?

    किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदना और बेचना इसको ट्रेडिंग कहते है. ट्रेडिंग करने के बहुत सारे स्टाइल होते है जिनको हमने ऊपर डिटेल में बताया है।

  2. ट्रेडिंग के 4 कौनसे प्रकार है?

    4 प्रकार के ट्रेडिंग होते हैं: डे ट्रेडिंग, स्विंग ट्रेडिंग, पोजीशन ट्रेडिंग और स्काल्पिंग ट्रेडिंग। ट्रेडर्स इनमें से किसी भी ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी का चयन कर सकते हैं, लेकिन इससे पहले उन्हें इन बारे में जानना चाहिए और इनसे जुड़े रिस्क को पहचानना चाहिए।

  3. बेगिन्नेर ट्रेडिंग कैसे सीखें?

    बेगिन्नेर ट्रेडिंग कैसे सीखें इसके लिए हमने एक पूरा डिटेल आर्टिकल लिखा है।

  4. बेगिन्नेर के लिए कौनसा ट्रेडिंग सबसे अच्चा है?

    आपको पहले intraday ट्रेडिंग सीखकर उसे शुरू करना चाहिए, फिर आप को अनुभव होने के बाद दुसरे ट्रेडिंग स्टाइल सीखकर उन्हें इस्तेमाल में ला सकते है।

  5. How to learn to trade in Hindi?

    ट्रेड सीखने के लिए हमने डिटेल में एक आर्टिकल लिखा हाउ उसे ज़रूर पढ़े।

  6. क्या ट्रेडिंग जुआ है?

    ट्रेडिंग एक व्यापार है जिसमें रिस्क होता है। जो समझदारी से और स्ट्रैटेजी बनाकर ट्रेडिंग करते हैं, वे इससे बिजनेस की तरह पैसा कमा सकते हैं। बाकी लोग जो सिर्फ जल्द से जल्द पैसा कमाना चाहते हैं बिना रिसर्च किए, दिमाग लगाए, तो उनके लिए ट्रेडिंग जुआ ही होती है।

  7. 3 बड़े स्टॉक मार्केट कौनसे हैं?

    NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज), BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) लिमिटेड और मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज लिमिटेड भारत के मेजर स्टॉक मार्केट हैं। इन स्टॉक एक्सचेंजों से निवेशक स्टॉक्स, बॉन्ड्स और ईटीपी में व्यापार कर सकते हैं। भारत में इसके अलावा भी बहुत सारे स्टॉक एक्सचेंज हैं।

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